गुरुवार, 21 सितंबर 2017

सपने.. कभी नहीं मरते

सपने
सपने कभी नहीं मरते....
न ख़ुद मरते हैं...  न मरने देते हैं हमें...

जिलाये रहते हैं जबरन....
जलाये रहते हैं लौ एक मद्धम-सी..
कि नहीं ... रास्ता ख़त्म नहीं हुआ....
बढ़ो....  हम हैं....  तुम्हारे लिए....  तुम्हारे सपने...

ख़त्म नहीं होने देते विश्वास
बढ़ाए रहते हैं बेचैनी...
कि नहीं...  पूरा करो हमें...  कोशिश करो.... लगा दो जान
हम हैं...  तुम्हारे लिए.... तुम्हारे सपने

चुक भी जाएँ हम.... हमारा सामर्थ्य..  तब भी
झाँकने लगते हैं
आँखों से.....  हमारे बच्चों की....
कि नहीं...  चुक नहीं सकते तुम...
हार नहीं सकते तुम....
हम बनेंगे तुम्हारा सामर्थ्य....

ज़िन्दा हैं...  जिलाये रखेंगे तुम्हें भी...
भरोसा है हमें... पूरा करोगे तुम ही...
हमारी पूर्णता तुमसे है...
हम हैं...  तुम्हारे लिए....  तुम्हारे सपने...
                                  - श्यामली