बुधवार, 4 सितंबर 2019

चाँद

चाँद
छुपाना चाहेंगे तुम्हें बादल
रोकना चाहेंगे तुम्हें
रौशनी बिखराने से
हो सकता है
कामयाब भी हो जाएं कभी....
स्वभाव है उनका...
वर्जनाएं पैदा करने का...
मगर..... तुम याद रखना
तुम्हारा स्वभाव है लड़ने का
अंधेरों के खिलाफ़...
तुम्हें रौशन करना है संसार
जिसे उम्मीद है तुमसे
अंधेरे से नहीं ....
विश्वास है
तुम भरपूर उजाले के साथ आओगे...
कोई ग्रहण तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता..
- श्यामली

मैं शिक्षक हूँ

मैं शिक्षक हूँ
मैं समाज निर्माता, मार्ग प्रवर्तक हूँ
मैं शिक्षक हूँ....
मुझमें है पिता-सी दृढ़ता, माँ सी कोमलता
भाव मित्रवत् राह सत्य की दिखलाता
श्रेष्ठ सखा नैतिकता पथ दिग्दर्शक हूँ
मैं शिक्षक हूँ
मैं नहीं विदूषक, व्यापारी, चारण, न ही मैं चाटुकार
न पहन मुखौटा कर पाऊँ अभिनेता सा दोहरा व्यवहार
मैं सन्मार्गी, निश्छल हूँ, सत्य समर्थक हूँ
मैं शिक्षक हूँ
ना जाति-धर्म, ना रंग-रूप का भेद करूँ
कोमल मन बच्चों में मानवता धर्म भरूँ
मैं समता, नैतिकता का परिवर्धक हूँ
मैं शिक्षक हूँ
मत आंको मेरा मूल्य अर्थ-संसाधन से
मैं स्वयं हुआ सम्पन्न ग्यान-संवर्धन से
माँ सरस्वती का गौरवशाली साधक हूँ
मैं शिक्षक हूँ
- श्यामली