thank u......या शुक्रिया......या happy teacher's day...
बड़े छोटे शब्द लग रहे थे इसीलिए इतनी देर से लिखने बैठी कि जब भी लिखूँगी इत्मीनान से लिखूँगी .......
कहते हैं सबसे पहला शिक्षक हमारे जीवन में हमारी माँ होती है.....मेरे लिए भी मेरी माँ थी लेकिन उसके साथ, थे कई लोग ऐसे जिनहोने जाने अंजाने मुझे अनेकानेक रूप से शिक्षित किया .......मुझे बहुत कुछ सिखाया मेरी मौसी जिन्हें मैं मम्मी कहती थी और समझती भी थी .....क्या क्या सिखाया सब याद भी नहीं ....लेकिन एक गुण जो मैंने उनसे सीखा कढ़ाई ....मेरे मौसाजी जिनहे मैं दादा कहती हूँ उन्होने सिखाया स्व-अनुशासन और निर्भीकता.....मेरे पापा से मुझे जो गुण मिले वो हैं गायन और साहित्य की समझ.....मेरे बड़े भाई राजेश मिश्रा, जो मेरे आदर्श हैं .....मेरी बड़ी बहन सरला दीदी....जिनसे मैं बहुत डरती थी, लेकिन उन्हीं के पदचिन्हों पर चलना मेरी पहली पसंद था.....
इन सबको कभी मैंने एक छोटा सा thank you तक नहीं कहा .......लेकिन आज तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ इन सबकी क्योंकि वो संस्कार जो इन लोगो ने मुझे दिये, आज मैं अपनी बेटियों को भी वो ही संस्कार देना चाहती हूँ, और कोशिश भी कर रही हूँ.....
मैं बेहद शुक्रगुजार हूँ अपने तमाम उन शिक्षकों की जिन्होने मुझे शिष्या कम अपनी बेटी समझ कर शिक्षित किया .....
जीवन में हम जितने लोगो से भी मिलते हैं, कुछ न कुछ ज़रूर सीखने को मिलता है......शुक्रिया उन सभी लोगों का.......
नमन
भावपूर्ण नमन
बड़े छोटे शब्द लग रहे थे इसीलिए इतनी देर से लिखने बैठी कि जब भी लिखूँगी इत्मीनान से लिखूँगी .......
कहते हैं सबसे पहला शिक्षक हमारे जीवन में हमारी माँ होती है.....मेरे लिए भी मेरी माँ थी लेकिन उसके साथ, थे कई लोग ऐसे जिनहोने जाने अंजाने मुझे अनेकानेक रूप से शिक्षित किया .......मुझे बहुत कुछ सिखाया मेरी मौसी जिन्हें मैं मम्मी कहती थी और समझती भी थी .....क्या क्या सिखाया सब याद भी नहीं ....लेकिन एक गुण जो मैंने उनसे सीखा कढ़ाई ....मेरे मौसाजी जिनहे मैं दादा कहती हूँ उन्होने सिखाया स्व-अनुशासन और निर्भीकता.....मेरे पापा से मुझे जो गुण मिले वो हैं गायन और साहित्य की समझ.....मेरे बड़े भाई राजेश मिश्रा, जो मेरे आदर्श हैं .....मेरी बड़ी बहन सरला दीदी....जिनसे मैं बहुत डरती थी, लेकिन उन्हीं के पदचिन्हों पर चलना मेरी पहली पसंद था.....
इन सबको कभी मैंने एक छोटा सा thank you तक नहीं कहा .......लेकिन आज तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ इन सबकी क्योंकि वो संस्कार जो इन लोगो ने मुझे दिये, आज मैं अपनी बेटियों को भी वो ही संस्कार देना चाहती हूँ, और कोशिश भी कर रही हूँ.....
मैं बेहद शुक्रगुजार हूँ अपने तमाम उन शिक्षकों की जिन्होने मुझे शिष्या कम अपनी बेटी समझ कर शिक्षित किया .....
जीवन में हम जितने लोगो से भी मिलते हैं, कुछ न कुछ ज़रूर सीखने को मिलता है......शुक्रिया उन सभी लोगों का.......
नमन
भावपूर्ण नमन
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