शनिवार, 25 जून 2022

Generation Gap

"स्टॉप इट अवनी। एसी बंद करो। यह क्या है हर समय एसी चलाते हो? हमारे जमाने में हम छत पर खुली हवा में बैठते थे। कूलर चलाने के लिए पापा की परमिशन लेनी पड़ती थी। पंखा है, वह चला लो। यह आजकल के बच्चे ..... ईला बड़बड़ाती चली जा रही थी।
"जब देखो मोबाइल फोन हाथ में। जाने कौन से टाइप की पढ़ाई है? अरे हम भी पढ़ते थे, घर के सारे काम भी करते थे। मजाल है कभी खराब नंबर आए हों! हुंह" अवनी ने कान में इयरप्लग्स लगाकर फोन में चल रहे गाने का वॉल्यूम और बढ़ा दिया।
"खाना नहीं खाएंगे .....बस मोमोज खिला दो, समोसा खिला दो, कुरकुरे खिला दो। हम लोगों को तो दो टाइम रोटी और नाश्ते में पराठा मिलता था बस। यहां चाहे कुछ भी अच्छे से अच्छा बना दो खाएंगे ही नहीं। ना टाइम से खाना, ना टाइम से सोना। हाथ पैर तो हिलाएंगे ही नहीं। कहते हैं पढ़ रहे हैं फोन में। ठीक है, माना.... लेकिन फ्री टाइम में भी फोन में ही गेम, फोन में ही मूवी! ऐसा लगता है जैसे फोन से बाहर तो दुनिया है ही नहीं। वहीं इंस्टाग्राम व्हाट्सएप में दुनिया बसा रखी है। अरे जितना उस पर टाइम बिताते हो, इतना मां के साथ बैठकर बतिया लिया करो कभी। सिर दुखेगा तो दबाने मां ही आएगी.... इंस्टाग्राम व्हाट्सएप वाले दोस्त नहीं।"
बच्चों की नानी अरुणा बड़ी देर से सुन रहीं थीं, समझ भी रहीं थीं। किचन में जा कर दो कप चाय बना कर लाईं और इला को ड्राइंग रूम में बुलाया। "बैठो, बहुत हुआ। क्यों अपना बीपी बढ़ा रही हो?" 
ईला झुंझलाकर बोली, "मम्मी देख तो रही है आप। परेशान हो गई हूं मैं। क्या करेंगे यह बच्चे आगे चलकर? इनके भविष्य की बड़ी चिंता हो रही है मुझे।" 
"ईला शांत हो जा। इसी को कहते हैं जनरेशन गैप। उनकी बातें तेरी समझ में नहीं आएगी और उनको तेरी।" अरुणा उसकी बात काटते हुए बोलीं।
"क्या मां आप भी?" इला बोली, "आप तो जानती हैं कितनी प्रोग्रेसिव सोच की हूं मैं। आज के ज़माने के साथ चलने वाली आधुनिक नारी हूं, सब समझती हूं।"
"अच्छा! सब समझती तो इतना परेशान नहीं होती।" अरुणा मुस्कुराईं, "सब समझती तो अपना समय भूल नहीं जाती। हां, तुम्हारे टाइम पर ऐसी नहीं था.. लेकिन पापा के जाते ही सबसे पहले कूलर चला कर उसके सामने आसन जमा कर कौन बैठता था? फ्रिज का पानी पीकर बोतल भरना तुम भी भूलती थी बिटिया। सारा दिन टेप रिकॉर्डर पर गाने कौन सुनता था? शोर से बाबा डिस्टर्ब ना हों इसलिए तुमने ही तो जिद करके वॉकमैन खरीदवाया था, भूल गई? और पूरा दिन उसको कान में लगाकर घूमती थी।"
ईला वाकई अपने उसी टीन-एज के टाइम में जा चुकी थी.... वह भी हमेशा मां का हाथ बटाने में जी चुराती थी यह भी याद आया उसे। अरुणा बोलती जा रहीं थीं, "भूल गई? जब भी करेला, टिंडा या परवल की सब्जी बनती थी तुम लोगों के लिए टमाटर आलू बनता ही था। वरना खाना छूते तुम लोग?" ईला झेंप गई।
अरुणा ने कहा, "यह सच है कि इतना टाइम मोबाइल पर बिताना ठीक नहीं। लेकिन बच्चों के ऊपर प्रेशर भी तो देखो! तुम लोगों के 65% नंबर आने पर भी मिठाईयां बांटी हैं हमने। लेकिन इन पर प्रेशर 95% लाने का है.... क्या करें यह भी? जितना टाइम तुम्हारे पास होता था उतना ही तो है इनके पास भी..... लेकिन 95% लाने के लिए इन्हें मेहनत कितनी करनी पड़ेगी यह सोचा कभी? कभी इनकी मेहनत की इज्ज़त करके रात को जागती अवनी को कॉफी बना कर दी तुमने? बच्चों को कोसने के बजाय उनके चश्मे को पहन के कभी देखो और समझो। मैं यह नहीं कहती कि व्हाट्सएप इंस्टाग्राम चलाना सही है... लेकिन यह तुम्हें समझाना पड़ेगा कि वो लोग उसके अपने हैं या तुम... तुम उनको इतना प्यार दो कि उन्हें बाहर तलाशना न पड़े। इस उम्र में बच्चों को दोस्त प्यारे होते हैं... तो दोस्त बनने की कोशिश कर न बेटा। इस जेनरेशन गैप की दीवार को तोड़कर अपने बच्चे की तरफ प्यार का हाथ बढ़ा, उसका साथ दे।  बाकी भविष्य ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दो ... अपने संस्कारों पर भरोसा रखो.... बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा। कुछ समझी बिटिया या और लेक्चर दें?" हंसते हुए अरुणा ने कहा।
ईला की समझ में आ चुका था... अब बस उसे अमल करना था, जिसका वह प्रण ले चुकी थी । धीरे से बुदबुदाई - "इस जेनरेशन गैप की तो ऐसी की तैसी।"

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