गांधीजी की आज के समय में प्रासंगिकता को जानने के लिए पहले गांधीजी को जानना आवश्यक है।
गांधी कौन?
• गांधी वो जिसने अन्याय के खिलाफ़ आवाज उठाना सिखाया।
• गांधी वो जिसने लोगों का सत्य और अहिंसा में विश्वास जगाया।
• गांधी वो जिसने स्वदेशी अपनाना सिखाया।
• गांधी वो जिसने धर्म, जाति और ऊंच नीच का भेद मिटाया।
• गांधी वो जिसने अपने देश, अपनी मातृभूमि पर गर्व करना सिखाया।
• गांधी वो जिसने स्वच्छता का पाठ पढ़ाया।
ये सब बातें जो उन्होंने सिखाईं बताई, क्या आज प्रासंगिक नहीं हैं? कोई हमारे साथ कुछ भी अन्याय करे, यदि हम आवाज नहीं उठाएंगे, आप विरोध नहीं करेंगे तो हमारा शोषण होता रहेगा और उसके जिम्मेदार हम खुद होंगे।
वहीं यदि हम सत्य को नहीं अपनाएंगे, असत्य के गुलाम बने रहेंगे तो हम जानते हैं कि कभी भी अपनी स्वयं की नज़रों में उठ नहीं पाएंगे क्योंकि हमारी अंतरात्मा जानती है कि सत्य का रास्ता ही वास्तविक रास्ता है।
वैसे ही यदि हम किसी को हानि पहुंचाएंगे तो खुद की भी हानि होने के लिए तैयार रहना होगा और इससे कभी भी किसी का भी भला नहीं हो सकता। सही कहा गया है कि तलवार के जवाब में तलवार ही उठाएंगे तो सिर्फ तलवारें ही बचेंगी। तात्पर्य ये है कि अहिंसा के रास्ते ही हमें किसी समस्या का समाधान मिल सकता है।
स्वदेशी अपनाने से तात्पर्य है कि यदि हम विदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे तो फायदा विदेशियों का होगा और अपने देशवासियों का नुकसान। हमें हमेशा स्वदेश में बनी हुई वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए जिससे हमारे देश वासियों को रोजगार भी मिलेगा और देश की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी, आयात के खर्चे भी कम होंगे।
गांधीजी ने हर धर्म हर समुदाय के लोगों को गले से लगाया। उनके अनुसार हम सभी एक ही ईश्वर की संतानें हैं तो ये भेदभाव क्यों? यदि हम आज भी भेदभावों से दूर हो कर सबको समान समझेंगे तो वे भी हमारा सम्मान करेंगे एवं हमारा पूर्ण रूप से सहयोग करेंगे।
गांधीजी ने ये भी सिखाया कि हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व करना चाहिए। आज बहुत से लोग अपने ही देश की बुराई करते हैं और बाहरी देशों की तारीफ करते हैं। हो सकता है कि हमारे देश में कुछ कमियां हों, तो उन कमियों को ठीक करना हमारा ही दायित्व है और हमें अपने दायित्व से भागना नहीं चाहिए। यदि हमारे घर में कोई समस्या आ जाती है तो हम उसकी मरम्मत करते हैं, ना कि घर को कोसते हुए उसे छोड़ कर चले जाते हैं। इसी लिए हमें अपने देश में रहकर उसके उत्थान में अपना सहयोग देना चाहिए।
गांधीजी ने हमें स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। ऐसा नहीं है कि उन्होंने कभी इस बारे में सिर्फ ज्ञान दिया था, वो हमेशा अपने आश्रम की साफ सफाई खुद ही करते थे। उनका मानना था कि संपूर्ण स्वास्थ्य का रास्ता स्वच्छता से हो कर ही गुजरता है। यदि हम साफ सफाई का ध्यान रखेंगे तो स्वयं भी स्वस्थ रहेंगे और अपने आसपास के वातावरण को भी स्वस्थ रख सकेंगे।
फिर भी क्यों इतना विरोध?
• सत्य का रास्ता बहुत ही मुश्किल होता है अतः हम मानने से कतराते हैं।
• हम डरते हैं कि यदि हम अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे तो हमारे साथ कुछ गलत हो सकता है। इस डर से हम अन्याय सहते जाते हैं, अपना शोषण करवाते हैं।
• विदेशी वस्तुएं फैशन में हैं और स्वदेशी पुरातन पंथी लगती हैं। विदेशी वस्तुओं को अपनाने वाले उच्च स्तरीय माने जाते हैं।
• हमारे अंदर सहनशीलता की कमी है और हम ईंट का जवाब पत्थर से देना पसंद करते हैं भले ही सामने वाला जवाब में और बड़ा हथियार ले कर खड़ा हो जाए।
• हमारा मानना है कि स्वच्छता का खयाल रखना एक विशेष समुदाय का काम है और हम अगर साफ सफाई ही करते रहेंगे तो अपने काम कब करेंगे।
• सबसे बड़ा कारण - व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का अधकचरा ज्ञान। लोग अपनी सुविधा के अनुसार चीजों को सही या गलत ठहराते हैं। कहते हैं ना कि हम दूसरों के लिए बेहतरीन जज हैं और अपने लिए बेहतरीन वकील।
• हम उनके द्वारा लिए गए फैसलों को आज के समय के हिसाब से देखते हैं और उन्हें गलत ठहराते हैं। हम भूल जाते हैं कि उस समय का भारत अलग था, उसकी चुनौतियां अलग थीं। हम भूल जाते हैं कि उनके फैसलों पर सवाल उठाने का अधिकार भी उसी आजादी की वजह से हमें मिला है जिसके लिए उन्होंने अपनी ऐश ओ आराम की जिंदगी को त्याग दिया था।
यदि सवाल हों तो क्या करें?
पहले तो गांधी को पढ़ें, उनके बारे में देश विदेश की महान विभूतियों के विचार पढ़ें, किसी पढ़े लिखे व्यक्ति से परिचर्चा करें।
मजबूती का नाम महात्मा गांधी
भारत माता की जय।
- श्यामली
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