गुरुवार, 29 अगस्त 2013

संयम की बात - तेज़ वाहन चलाने वालों से

मित्रों,
कल जन्माष्टमी  तैयारियों में व्यस्त रही दिन भर, तमाम बातें मथती रहीं मस्तिष्क को, लेकिन हाथ  तो दो ही हैं न; लिखना संभव नहीं हो पाया। जन्माष्टमी यानि उस कृष्ण का जन्म जिसने हमें सिखाई मानवीयता, पराक्रम, जीवन-दर्शन और भी न जाने कितनी महत्त्वपूर्ण बातें। इनके अंतर्गत एक बेहद महत्त्वपूर्ण बात 'संयम' जिस पर आज की मेरी ये पोस्ट आधारित है। संयम का हर क्षेत्र में बेहद महत्व है घर में, ऑफिस में, रोड पर, मार्केट में, ख़ास तौर पर हमारे व्यवहार में। संयम एक ऐसा शस्त्र है जिसके द्वारा हम अपने से अधिक बलवान को परास्त कर सकते हैं।

आज संयम की बात उन लोगों से जिन्हें अपने गन्तव्य तक बहुत जल्दी पहुंचना होता है, यानि तेज़ वाहन चलाने वालों से। मित्रों, एक बात हमेशा याद रखें कि आप भी इंसान हैं, चूक आपसे भी हो सकती है; और ये चूक बहुत भारी भी पड़ सकती है आप पर।  आपका जीवन बेहद मूल्यवान है, आपके लिए भी और आपके अपनों के लिए भी। वाहन तेज़ चलाने के अलावा भी एक सुरक्षित उपाय है समय से गंतव्य पर पहुँचने का - कुछ मिनट पहले निकलिए, आप समय से और सुरक्षित अपने गंतव्य पर पहुँच जायेंगे।

मित्रों, कुछ मिनट देर से पहुंचेंगे तो हो सकता है आपका कुछ नुक्सान हो किन्तु जल्दी पहुँचने की कोशिश में अगर आपको चोट पहुँचने की सम्भावना भी है तो 'दुर्घटना से देर भली'। जीवन एक बार मिलता है, उसे यूँ ही दाँव पर न लगाना ही बुध्धिमानी है, क्योंकि मित्रों 'ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा'। तो समय का ख़याल रखें और उससे भी ज्यादा अपने आप का ख़याल रखें।

शुभकामनाएँ।  

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